C0=32== धूमधाम चुदाई कहानियाँ - Chapter 32 - EroticPad.com
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धूमधाम चुदाई कहानियाँ मेरा प्रेमी और मकान मालिक का लड़का

मेरा प्रेमी और मकान मालिक का लड़का

इस वक्त मेरी उम्र पच्चीस साल है, मैं विवाहित और एक बच्चे की माँ हूँ, मेरे पति एक फेक्ट्री मे सुपरवाइजर हैं, जब मेरी शादी हुई तब मेरी उम्र बीस साल थी, मै ये शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि उस समय अपने एक दोस्त के साथ मेरा लव अफेयर चल रहा था, वो बहुत रोमांटिक और दिलफेंक युवक था, कभी कभी तो उसकी इस आदत का मुझ पर गहरा असर पड़ता, जहां भी किसी लड़की को अपने करीब पाता उसे वो अपनी मीठी मीठी बातों से फंसाने की कोशिश करता, बस मै उसकी इसी बात का बुरा मान जाती, कई कई दिन तक मै उससे बात नहीं करती थी, वो तरह तरह से मुझे मनाने की कोशिश करता तो मै मान भी जाती थी, उसका और मेरा प्यार अभी तक शारीरिक सम्बंधों के बन्धन से दूर था,

ऐसा नहीं था की उसने अपनी इच्छा जाहिर नहीं की थी, वो कई बार मुझे चोदने की कोशिश कर चूका था, उसने कई बार मुझे सहला सहला कर गरम भी कर दिया था, चूचियां दबा दबा कर उनमे आग भी भर दी थी, मगर मै अपनी मर्यादाओं की सीमा नहीं लांघना चाहती थी,

मेरा इस बात पर अटूट विस्वाश था की चूत की सील सिर्फ पति तोड़ सकता है क्योंकि उस पर उसी का हक होता है,ऐसा भी नहीं था की मेरा प्रेमी मुझसे शादी नहीं करना चाहता था, सब कुछ ठीक था मगर मै शादी से पहले चुदवा कर सुहाग रात का मजा फीका नहीं करना चाहती थी, मेरा प्रेमी कई बार गुस्से से कहता की मै उससे प्यार नहीं करती, उसने शादी का वादा कसमे खाकर की मगर मेरा एक ही जवाब था की अगर कुछ होगा तो शादी के बाद ही होगा, मैंने उसे साफ साफ जवाब दे दिया की मै शादी से पहले वो चीज हरगिज नहीं दे सकती जिसकी वो जिद कर रहा है,

मगर वो चालु था, उसने कई बार चाहा की मै बहक जाऊं और बहक कर उसकी बात मान लूँ, एक दिन वो मुझे एकांत में ले गया, वहाँ ले जाकर उसने मुझे सहलाना शुरू कर दिया, वो ऐसा कई बार कर चूका था इसलिए इस ओर मैंने कोई ज्यादा ध्यान नहीं दिया, वो जब भी ऐसा करता तो मै काफी गरम हो जाती थी मगर संयम का दामन मेरे हाँथ से नहीं छूटता था, मगर उस दिन मै अपने आप को नहीं रोक सकी,

वो मेरी दोनों चुचियों पर हथेली चला रहा था और मै हमेशा की तरह आँखें मूंदे उसकी इस हरकत का मजा ले रही थी, तभी उसने मेरा हाँथ पकड़ा और अपने खड़े लंड को मेरे हाँथ में पकड़ा दिया, उसका लंड काफी लंबा और मोटा था, इतना ही नहीं वो आग की तरह जल भी रहा था, जब मैंने आँखें खोल कर अपने हाँथ की तरफ देखा तो मैं चौंक पड़ी, " उफ क्या है ये ? " मैंने उसका लंड हाँथ से छोड़ दिया तो वो सांप के फन की तरह फुंफकार उठा, मेरा रोवाँ रोवाँ खड़ा हो गया था उस समय, मै अच्छी तरह जानती थी कि ये लंड है मगर मैंने हर लड़की कि तरह मासूमियत दिखाते हुवे ये सवाल पूछा था, हाँथ से छूटते ही लंड एक तोप कि तरह उपर उठा और सीधा हो गया, मै अपनी पलकें झपका झपका कर उसे देख रही थी, मेरी मासूमियत देख कर मेरे प्रेमी के होंठों कि मुस्कान गहरी हो गई,

" इसे नहीं जानती क्या है ये " उसने अपना अकड़ता हुआ लंड अपने हाँथ से पकड़ कर हिलाते हुवे कहा,
" नहीं...क्या है ये," मैंने कहा

" हाय तुम्हारी इसी मासूमियत पर तो हम फ़िदा हैं," वो फिर से मेरी चूचियां दबाता हुवा बोला, " खैर अब मै ही बता देता हूँ कि ये क्या चीज है," फिर वो अपने खड़े लंड को हाँथ से इधर उधर घुमा कर देखता हुवा बोला,
" वैसे तो इसे कई नामों से पुकारा जाता है, मगर मैं इसे कुछ और ही समझता हूँ,"

क्या समझते हो तुम इसे," उसके मोटे और लम्बे लंड का सम्मोहन मेरे दिलो दिमाग पर छाता जा रहा था, उसने अपना लंड क्या दिखाया की उस पर से मेरी नजर हट ही नहीं रही थी, मै यहाँ झूठ नहीं लिखूंगी, प्रेमी का कठोर विशाल, फुंफकारता लंड देख कर मेरी तबियत ऐसी फिसली की मेरी चूत के मुंह में पानी भर आया, मेरी चूत पूरी गीली हो गई और लगा की अन्दर चीटियाँ रेंग रही हैं, मेरी चुचियों में भी कलबलाहट शुरू हो गई थी, मेरा मन यही चाह रहा था की वो मेरी चुचियों को हाँथ से पकड़ पकड़ कर खूब मसले और दबाये, उस समय मेरी मस्ती परवान चढी हुई थी, मैंने आँखें मुंद ली थी और वो कपड़े के उपर से ही मेरी चुचियों को दबाये जा रहा था, उस समय सी...सी के सिवा मेरे मुंह से कुछ और नहीं निकल पा रहा था,

सच कहती हूँ उस दिन मै मर्यादाओं को भुला बैठी, मेरा सुहाग रात वाला इरादा तो तास के पतों की तरह बिखर गया, बस सब कुछ भूल कर दिल चाह रहा था की लंड को अपने होंठों के बिच दबा कर खूब चुसुं, उसका लंड सचमुच मुझे बहुत अलबेला लग रहा था, जैसा वो खुद गोरा था वैसा ही गोरा उसका बमपिलाट हथियार भी था, ताज्जुब की बात तो ये थी कि ऐसा ना तो मैंने सोचा था और ना ही कभी किया था, हाँ मगर सुहाग रात वाले सपने कि ये एक कड़ी जरूर थी, उस समय मै पूरी तरह से पागल हो चुकी थी, लंड मेरी आँखों के सामने बार बार फुंफकार मार रहा था, तभी उसने मेरी बात का जवाब दिया तो मेरी चेतना लौटी,

" इसे मै अपना छोटा भाई समझता हूँ " वो अपना लंड बड़ी मस्ती और कामुकता से सहलाता हुवा बोला, मेरी नजरें अब भी उसके उछलते लंड पर अटकी हुवी थी,

" तुम इसे बहुत गौर से देख रही हो ? " वो मुझे अपने लंड को देखता पाकर बोला,

" हूँ ! शायद इसलिए कि इसे मैंने पहली बार देखा है," मैंने अपने सूखे गले को थूक से तर करते हुवे कहा

" इससे तो मै तुम्हारी पहचान बहुत पहले ही करवा देता मगर तुम तैयार ही कहाँ होती थी ?" उसने अपनी चमकदार आँखों से मेरी तरफ देख कर कहा,

" मैंने इसकी कोई खास जरूरत नहीं समझी थी " मैंने दिल कि बात छुपाते हुवे कहा,
" तुम्हे कैसा दीखता है ये?" उसने पूछा

उसकी बात सुन कर मुझे मजाक सुझा तो मैंने कहा " हूँ... देख रही हूँ कि इसकी सूरत तुमसे बहुत मिल रही है इसमें कोई सक नहीं कि ये तुम्हारा छोटा भाई है,"

मेरी बात सुन कर वो बड़ी जोर से हंसा, वो समझ गया कि मै मजाक में लंड और उसकी सूरत में तालमेल बिठा रही हूँ,

" इसका जादु निराला है," वो बोला और अपने हांथों से लंड को सहलाने लगा,

" अच्छा तो क्या ये जादूगर भी है," मैंने हैरान होकर पूछा,

" इसका जादु देखना चाहती हो," उसने पूछा,

" हूँ ! मगर उलटी सीधी बात नहीं होनी चाहिए ,"

" नहीं तुम्हारी मरजी के बिना ये कोई भी उलटी सीधी बात नहीं करेगा,"

" ठीक है तब तो मैं इसका जादु जरूर देखना चाहूंगी," अब मेरी चूत में बुरी तरह कलबलाहट होने लगी थी, मेरे प्रेमी ने मचल कर मुझसे कहा, " मधु ये कमीज अपने बदन से उतार दो,"

" मोहन डीयर तुम्ही क्यों नहीं उतार देते," मैंने मचल कर कहा,

" बटन खोलना है, तुम खोल दो फिर मै ही उतार दूंगा," वो हंसते हुवे बोला

बस क्या था, मुझ पर तो अब वासना का भूत सवार हो चूका था, मै धीरे धीरे मदहोश होती जा रही थी, चूत अन्दर से पूरी तरह रसीली हो गई थी, मैंने तुंरत अपनी कमीज कि बटनों को एक एक कर खोल दिया और बोली " लो खोल दी हूँ बटन तुम इसे मेरे बदन से निकाल दो,"

" बांह में से तो तुम्ही को निकालना है,"

" मै बांह से निकाल दूंगी तो तुम क्या करोगे ?"

" यही तो जादु है, देखना कैसा जादु करता हूँ "

और जैसे ही मै अपनी कमीज को हाँथ उपर कर निकालने लगी उसने तुंरत मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया, मेरी दोनों चूचियां नंगी हो गई,

उसने अपने दोनों हांथों से मेरी नंगी चुचियों को पकड़ कर कस कर मसला तो मै सिसकारने लगी, जीवन में पहली बार किसी युवक ने मेरी नंगी चुचियों को हाँथ में लिया था, मेरा गनगना उठना स्वाभाविक था, सारे बदन का रोवाँ रोवाँ मरमरा उठा,

मेरी दोनों चूचियां हमेशा कि तरह अपनी औकात से ज्यादा फुल उठी थी, उस समय मेरी चूत भी गीली हो रही थी, ऐसा तभी होता था जब मोहन मेरी भावनाओं से खेलता था, वैसे सुबह सुबह भी चूचियां फुल जाती थी, पहले तो उसने मेरी चुचियों को दबाना शुरू किया और मेरा हाँथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया और मुझ से बोला

" जैसा मेरा दिल चाहे मै उसके लंड के साथ वैसा ही ब्यवहार करूँ," मैंने उसके बमापिलाट लंड को दबाना और सहलाना शरू कर दिया, शरीर में उसको छूने के कारण गुदगुदी हो रही थी,

जब मैंने उसका लंड पकड़ा तो मेरी चूत पहले से ज्यादा फुल कर फुद्फुदाने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे वो परदे से बाहार निकल कर लंड से पहली मुलाक़ात कर लेना चाहती हो, सलवार के अन्दर वो पिंजरे में बन्द चिडियाँ की तरह फुदकने लगी, मै अपने प्रेमी मोहन का एकदम बमपिलाट कड़ा लंड उत्साह के साथ सहलाने लगी, मेरा सारा शरीर कसमसाने लगा,

फिर मेरा प्रेमी मेरी चुचियों के निप्पल को होंठों के बिच दबा कर चूसने लगा, उसकी इस नई हरकत से मेरा सारा शरीर मस्ती से काँपने लगा, मुझ पर वासना पूरी तरह सवार हो गई, उसने अपने होंठों के जादू से मेरी चुचियों के निप्पल नुकीले बना दिये,

कैसा लग रहा है " उसने पूछा

" सी...पता नहीं है...पता नहीं मुझे क्या हो रहा है...एक अजीब सा नसा मुझ पर छाता जा रहा है..."

"अभी मै नया जादू शुरू करता हूँ...तुम निचे अपने घुटनों पर खड़ी हो जाओ, इससे तुम्हे एक नया अनुभव मिलेगा..." मोहन ने मुझसे कहा

मै निचे घुटनों पर खड़ी हो गई, मोहन ने अपना लंड पकडा और मेरी चुचियों पर अपने लंड का सुपाड़ा रगड़ना शुरू कर दिया, उसने सच कहा था, उसके लंड में अजीब सा जादू भरा था, मेरा सारा शारीर झनझना उठा, पहली बार दिल में एक इच्छा जागी की उसके लंड कि छाँव तले सो जाऊं और सारी उम्र नहीं जागुं, मै एक अजीब सी दुनिया में खो चुकी थी जहां हर तरफ मस्ती और खुशी का बोल बाला था,

" अब कैसा लग रहा है ?" उसने एकबार फिर पूछा

" सी...कुछ ना कहो...कुछ ना पूछो..." मैंने कसमसा कर कहा " बस इसे ऐसे ही मेरे दिल से रगड़ते रहो "

फिर उसने अपना लंड ठीक मेरी चुचियों के बिच में रख कर उन्हें आपस में सटा दिया, चुचियों के आपस में सट जाने से बिच में एक पतली सी गली बन गई थी, उसी गली में लंड फंसा था, बड़ा ही मजेदार नजारा था, मैंने उसे पूरा सहयोग करने का मन बना लिया था, फिर वो मेरी चुचियों पर धक्के लगाने लगा, उसके लंड के सुपाडे से कोई चिकनी सी चीज रीस रही थी, जिसकी वजह से चुचियों के बिच बनी उस पतली गली का रास्ता चिकना हो गया था,

मोहन अब उस पतली गली में आसानी से अपने लंड को घुमा रहा था, वो अपने लंड को उपर निचे कर धक्के लगा रहा था और उसका लंड चुचियों के बिच से अपनी मुंडी ( सुपाड़ा ) निकाल कर बार बार मुझे देख रहा था, उस समय मै पूरी तरह बावली सी हो गई, इधर चूत के अन्दर गर्मी कुछ इस तरह बढ़ी कि मैंने हथियार डाल दिये,

" सी...बस...बस...मै हार गई, " मैंने तड़प कर कहा " अब तुम इसका जादू यहाँ पर दिखाओ," मैंने अपनी चूत कि तरफ इशारा किया और उठ कर जल्दी से अपनी सलवार खोल डाली,

" ठीक है " वो मेरी जाँघों के बिच देखता हुवा बोला " यदि तुम्हारी यही इच्छा है तो अपना काम तो सेवा करना ही है,"

मै सलवार उतार कर लेट गई, उसने मेरी जांघें फैला दी और मुस्कुराता हुवा बड़े प्यार से मेरी चूत को सहलाने लगा, इससे मै और भी ज्यादा खौल उठी,

" सी,,, जल्दी आओ ना..." मैंने अपने हाँथ से अपनी चूत को रगड़ते हुवे कहा, यहाँ...यहाँ...कोई चीज खौल रही है, सी...ई...हाय...माँ...

फिर वो थोडा सा झुका और एक लम्बा मस्त चुम्बन मेरी चूत पर धर दिया, चूत उसके होंठों का स्पर्श पा कर सरसरा उठी, फिर उसने ढेर सारा थूक मेरी चूत के ठीक बिच में टपका दिया और उसे अंगुली से अच्छी तरह रगडा और वहाँ अपना लंड सटा कर मेरी तरफ देखा और बोला " अब आ रहा है "

" सी...आने दो सइयां ..." मैंने कसमसा कर कहा, " इतनी देर क्यों लगा रहे हो...बुद्धू इसे देख कर तो मैंने अपनी कसम तोड़ दी है "

" इसका फायदा भी तुम्हे मिलेगा " इतना कह कर उसने मेरे दोनों संतरों को अपने हांथों में ले लिया, उसका फुंफकार मारता बमपीलाट लंड बहुत जबरदस्त और कठोर था और पूरी मुस्तैदी के साथ चूत कि खास जगह से सटा हुवा था, मेरी चूत उसे इतना करीब पा कर बोखला रही थी, वो इतनी गरम हो चुकी थी कि जल्द से जल्द लंड से तालमेल बिठा कर उसे हजम कर जाना चाहती थी,

" आ रहा है " मोहन ने एक जोरदार आवाज में कहा

" आने दो " मै भी बुलंद आवाज में बोली,

बस फिर एक जोर का झटका मैंने अपनी चूत पर महसूस किया, ऐसा लगा कि मैंने बिजली का नंगा तार छू लिया हो, जैसे किसी ने एक चूहे को दुम से पकड़ कर जमीन पर एक जोरदार पटखनी लगाईं हो, एक तीखी टीस सी पीड़ा चूत से उठी और सीधा मेरे दिमाग से टकराई,

मेरे मुंह से चीख निकली " ऊई ...माँ...ये सी...ये क्या हुवा ?" मैंने जल्दी से उठ कर अपनी चूत देखी तो उसका मुंह एक फटे हुवे जूते कि तरह खुला हुवा था और एक भारी भरकम पैर कि तरह उसका लंड मेरी चूत में फंसा दिख रहा था,

" ओफ्फो ...क्या हुवा ?" मेरी चीख पर मेरे प्रेमी ने बौखला कर पूछा,

" ऊं ...हूँ...तुम्हे दिख नहीं रहा है क्या? " मैंने उसे आँखों के इशारे से अपनी चूत दिखाई,

" देखो...सी...देखो तुम्हारा,,,,,,,,सी...ई... छोटा भाई...छोटी सी जगह पर किस तरह फंसा पडा है, ऊई...ऊईमाँ...मर...गई...आह...मुझे दर्द हो रहा है,"
" इसमें इतना रोने पीटने कि जरूरत नहीं है," वो मेरी चरमराती चूत को सहलाता हुवा बोला, " ये जगह बनी ही इसके लिये है, यहाँ अब तुम्हे मेरा छोटा भाई फंसा दिख रहा है, इसमें हैरानी कि क्या बात है, आज नहीं तो कल यहाँ किसी ना किसी का छोटा भाई फँसना ही था,"

" उफ ...दर्द हो रहा है," मैंने दर्द से नाक सिकोड़ कर कहा, " क्या अब ये बाहर नहीं निकल सकता? हूँ...मुझसे इसकी जलन बर्दास्त नहीं हो रही...सी...सी..."

" अब तो ये आगे जाएगा " इतना कह कर उसने एक और वैसा ही झटका आगे कि ओर मारा, चूत से एक अजीब सी आवाज निकली, जैसा कपड़ा फटते समय निकलती है, फिर उसका लंड चूत में समाधी रमा बैठा, अब मै उछल रही थी क्योंकि उसके लंड का सुपाड़ा मेरे गर्भाशय के मुंह से टकरा रहा था, सुपाड़े कि रगड़ से गर्भाशय के मुंह पर मीठी मीठी गुदगुदी हो रही थी,
" ऊई...अब तो...हाय...अब तो मै उछल भी रही हूँ..."

" ऐसा ही होता है " वो मुस्कुरा कर बोला, वो मेरी चुचियों को दबाने लगा, एक बार फिर मैंने अपनी जाँघों के बिच देखा तो वहाँ गहरे लाल रंग का खून बूंद बूंद होकर टपक रहा था,
" हाय...सी...वही हुवा...जो मै सुहाग रात से पहले नहीं चाहती थी, तुमने इसका खून कर ही दिया, हटो ...तुम... बड़े वो हो...मै तुमसे नहीं बोलती,"

" तुम्हे बोलने को कौन कह रहा है मेरी जान," वो मुझे चूम कर बोला " अब तो तुम देखती रहो...तुम्हे मै कैसे कैसे जलवे दिखता हूँ,"

उसने चूत पर ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिये, मै आह...ऊई...सी...के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी, चूत कि कच्ची दीवारें काँप रही थी, मुझे अच्छी तरह याद है कि दसवां धक्का मेरी जवानी को ठंडा कर गया था, फिर जब तक मेरी शादी नहीं हो गई वो इसी तरह मेरी चूत पर कहर ढाता रहा था,

मुझे चुदाई से बहुत सुख मिलता था, इसलिए मै बिना डोर उसकी ओर खिंची चली जाती थी, उसने चूत पर पूरा अधिकार जमा कर उसका नक्सा ही बदल डाला था, अब पेशाब करते समय चूत से तेज सिटी कि आवाज निकलने लगी थी, किसी कारणवश उसका और मेरा जीवन भर का साथ नहीं हो सका था, ये बात बहुत लम्बी है, यहाँ लिख कर मै आप सब का समय खराब नहीं करना चाहती,

शादी के पांच साल बीत गये, मै अपने परिवार के साथ बहुत खुश हूँ, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कि एक बार फिर मकान मालिक का लड़का मेरी जिंदगी में ठीक वैसे ही दखल दे रहा है जिससे मै पांच साल पहले गुजर चुकी हूँ, वैसे अभी तक मैंने उसे कोई लिफ्ट नहीं दी है मगर पुरानी बातें जब याद आती है तो कभी कभी दिल डावांडोल होने लगता है,

एक दिन तो मै फिसल ही गई थी, उस दिन मै छत पर कपडे सुखाने गई थी, मकान मालिक का लड़का छत पर ही लेटा था, बस मुझे देखते ही वो शरारत पर उतर आया, वो फौरन अपना लंड खुजाने लगा, पहले तो मै इसे मात्र संयोग समझ कर मैंने उसकी हरकत नजरअंदाज कर दी, मगर फिर मैंने देखा कि वो अपना लंड खुजाने के साथ साथ सहलाने भी लगा, फिर उसने अपना लंड पेंट से बाहर निकाल कर हाँथ से सहलाना शुरू कर दिया, ये संयोग नहीं था बल्कि ये उसकी सोची समझी शरारत थी,

उस समय मुझे उसका लंड देख कर बहुत गुस्सा आया मै उसे डांटना भी चाहती थी मगर जब पूरा लंड बाहर निकाला तो मै उस विशाल और विकराल लंड को देख भीतर से गनगना गई, काला मोटा लंड मेरे पुराने प्रेमी मोहन के लंड से भी बहुत ज्यादा लम्बा मोटा तथा ठोस था, उसका लंड देख कर मुझे ऐसा लगा कि मेरा प्रेमी मोहन अपना लंड सहला सहला कर मुझे अपनी तरफ बुला रहा है, अतीत मेरे आँखों के सामने छा गया और मै चुपचाप उसकी ओर बढ़ने लगी, तभी पता नहीं कहाँ से मेरी तीन साल कि बच्ची वहाँ आ गई,

उसने मम्मी कह कर मेरी साड़ी का पल्लू अपनी तरफ खिंचा तब मेरी चेतना भंग हो गई, तब मुझे एहसास हुवा कि मेरे कदम गलत दिशा कि तरफ उठ रहे थे, मैंने आपने आप को संभाला और अपनी बच्ची के साथ निचे चली आई, वो लड़का अब हाँथ धो कर मेरे पीछे पड़ा है, उसका बहुत बड़ा विशाल लंड जब से पूरी तरह नंगा देखी हूँ, तबसे मुझे मेरे पहले प्रेमी मोहन कि याद अन्दर कि वासना को खोल कर तरो ताजा कर देती है, कभी कभी तो वो अपनी हरकतों से मुझे इतना गरम कर देता है कि मै सब कुछ भूल जाती हूँ, उसका बहुत बड़ा विशाल लंड जब से पूरी तरह नंगा देखी हूँ,

मेरे मकान मालिक का युवा लड़का जिसका नाम मनोहर है अभी तक कुंवारा है, है तो वो कुछ सांवला पर शरीर से बहुत हट्टा कट्ठा मजबूत कद काठी का युवक है, जबसे उसके तमतमाए नंगे लंड को देखी हूँ मेरा मन बैचैन हो गया है, अब मेरा मन उसे अन्दर से चाहने लगा है

मेरा प्रेमी और मकान मालिक का लड़का