C0=1== Papi Parivaar - Chapter 1 - EroticPad.com
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Papi Parivaar Chapter 1

दांपत्य सैक्स

जेमें-जेमें मिसेज टीना प्रार्मा अपन मुलायम होंठों से अपन पति के मुँह या कराह रहीं यी,
उनके पति उनाकी कमसिन कमर में उनकी पैन्टी की नीचे सरकारी जान थे। दोपहर में ही
आफिस में मिसेज द्धगमाँ के बदन में कामोत्तेज़ना अनंड़ाइयां में रहीं धी । आफिस के जवां- मदों
क तने हुये लन्दो पर नजर जाती और चुन या एक सनसनी मी पेदा कर दी थीं।

मिसेज दृगमाँ की उम कुछ चौतीम साल होगी … पर जवानी की कामौत्तेजना से कुछ कारि
नारि आयी थी । जवानी में कई आयिष्क ये उनके ८ पर एक मिस्टर शर्मा हो, जो उनके अब
पति था है आके लुलभाते अब्वगायाँ में खेल मके था । दोनों क्षेक्श के बडे मजे लेते था और' हम कलंनं
में निपुण ये । दोनो का शिव ओर शक्ति या तालमेल या।

"बच्चे सौं तो रह हैं ना "ऊँ" मिसेज म्रामाँ अपनी लम्बी उंगलियां पति क तनते हुए लन्ड
पर फेरती हुई बोलों ।

मिस्टर ग्रामाँ एक हाथ में पुरि] के ५1 -1 एँ वने पुचंपा। रते हुए ष ।१३। "वे फिक्र रहो ७। । हैं। न -1 । अमित
का कल मैच है, दो तो कबका मौ गया।"

टीना जी ने जवाब से उनके तने हुए लन्ड को प्यार में ऊपर- नीचे खींच कर उसकी फूलती
लाल सुपारी को अंगूठे में दबाया, "और सोनिया 7"

"सोनिया को छोडो, बो तो हमेशा लाईट आँन कर के मोती है। इम वक्र तो मुझे सिर्फ
तेरी गर्मा-गर्म चूत में मतलब हे।"

टीन। जी ने बाँधा को फैलाते हुए अपना चुन का द्वार अपने पति क दूसर हाथ के लिए
खोल दिया। मिस्टर शर्मा क हाथों का स्पर्श टीना की तपकती चून पर पडा तो उसक मुँह से
एक उन्मत्त कराह निकल पडी ।

"म्माअहा मजा आ रहा हे!" कहतें हुए टीना जी ने अपनी फड़कनी हुई चूत को पति की
उंगलियों पर मसलना शुरू कर दिया।

८" ओह दीपक । और ना तड़पा, बम चोद डाल मुझे ! मेरी चूत गीली हुई जाती हैं।"

यकीनन । जैम हीं मिस्टर शमां ने पत्मी की चुन में टोह ली, मादक गरम द्रवों ने उसकी
उंगलियों की मिगो दिया । शोख चुन फुदक कर उंगलियों की गुदगुदाने लगीं।

८" कसम जानेमना बिलकुल सुलग रहीं है तेरी वृत !" मिस्टर शर्मा तने हुए लन्द को पत्नी
की फड़कतीं मांद में घुप्ताते हुए बोले ।

" कस क चोद मुझे। चोद अपन मोटे लन्ड में !"

टीना जी ने पीठ क बल लेटते हुए अपनी टांगों की आर फैलाया और उन्मत्त होकर पति
के तगडे पुरुपांग को धधकती योनि में ठोंम डाला । पत्नी की प्रबल उत्तेजना ने बारुद में चिंगारी
का काम किया। मिस्टर शर्मा अपन मक्वरी…बरकम लन्ड को पत्नी की प्यासी मुलायम चूत में
लगे ढकेलने । पति के मज़बूत धक्कों को झेलने के लिएय टीना जी न अपनी मुडोन्न टांगें और
ऊंची उठ वीं । मिस्टर शर्मा की गांड पर अपनी ऐडियां टेक कर वे उनकी टक्कर में रेगुलर मिला

रहीं थीं। जेसे मिस्टर ठप्तमाँ अपन लौड़े को टीना जी की वृत क भीतर सस्कातें, वो चुन की
मांसपेशियों को लौड़े पर जकड़ना हुआ महसूस कर रहे था । उन्होंने बज या लन्ड टीना जी की
दहकती मान्द या इतना गहरा पोप डाल था है कि टट्टे टीना जी की गुलाबी गाँड से टकरा रहे
थे ।

"आठहा माँ कसम है बडी गर्मा रहीं हौ !" मिस्टर शर्मा अपन लन्ड पर जकड़नो मंसलना
क अनुभव से सिसक उठ ।

८८ चोद ! मासे चोद डालते मुझे !" टीना जी चुन क चोचले को पति के माँप्तल लन्ड से स्मड़तीं
हुई कराह पडी।

मिस्टर दीपक दोनो बाजुओं क बल अपन मजदूर बदन को झुलाते हुए कभी लन्ड को पत्नी
की चूसती चुत से बहर निकालते और जिर वपस मदक जकडन ने हंस देते । पत्नी की सुलगती
कामग्नि में उनका पौरुष लगतार कोयल शोक रहा था ।

"ऊउहा प्तार्भकै चोद दुर्दमा मार कम क चूसा" ८1-1। जी की अ ।णुऱ पूदृपृढ़ या अपने चंदोंदा ९
लन्ड को ठोंसतें हुए मिस्टर ठग़र्या हुकरि ।

मिस्टर ठग़माँ के हर वहशी उन्हें क टीना जी विग्नर से उचक … उचक कर जबाब देतीं और
जव लन्ड भीतर बुंपता तो कराह उठती ।

"ऊन्धठ ! ओहृहृहृहा चोद दे! बस ऐसे ही! और कस के! ओहृहूह" तीन जी आगोश या
वोखा । शर्मा दम्पत्ति अपनी प्रषल कामकी-ढ़। में पृरौ ८1९६ नी -1 था । देह की सुलगती प्यास की
तृप्ति से पानं। अब तारा दुनिया से' अनजान हो चुक ये।

to be continued...

Chapter 1