C0=4== Papi Parivaar - Chapter 4 - EroticPad.com
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Papi Parivaar Chapter 4

कौन बनेगा चौद्पती

मौनिया ने फिर छंद से आका तो अपने डैडी के चमचमाते लन्ड की मम्मी की खुली चूत पर
पहल जैसें कश्वार्यंरन पाया। सोनिया ने फिर अपने फड़कते चोचले' को स्मड़ना चालू कर दिया।

उसने कली जैसे उत्तेजिन चोचले को इतना रगडा कि दूसरी बार चरमानंद पर पहुच गयी।
दोनो डंगलीयों से अपनी टपकती वृत को मसेलतीं हुई मते से ऐठने लगी ।

चरमानंद जब थमा तो कुछ ऐसी शरम आयी कि चुपचाप अपन कमर की ओर वपासे चल
पडी। अपन कमर में बिस्तर पर लेटी और सोन की कोरिन्हम्ह तो की पर उसक सर कामुक
खयानों से मन्ना रहा था । डर भी लग रहा था कि अपन ही बाप से चुदने की कल्पना क्यों उसे
उत्तेजित कर रहीं थी!

मालूम नहीं कहीं दो मानसिक स्म से बीमार तो नहीं यी 7 बस एक ही बार मालूम पी -
कि आज आके 'षद-गृ में क्षेक्ल क एक णानेष र ने ७1-4१ लिया था और दो इस जानवर से और
खेलना चाहती पी।

अपने बाप के लन्ड की और राजेश के लन्ड की कल्पना कर उसने निश्चय किया कि जेमा
मजा उसने हस्तमैथुन से पाया था, उसे फिर' पायेगी। परन्तु इसे बार एसे लन्ड प सो उस्की
चूर की गमाँ-ब्बक्वरम उबलते लन्ड के तेल से लवालब मर कर उसे मजे से बारिश कर दे ।

सोनिया की जवाअनी क तेवकं देख कर उसकी माँ ने उसे "पालां- डी" दे रखी थी - कारि
गुलछर्रे उड़ते पांव भारी न हो जाय । बम अब वया छिता थी 7 कोई लड़का मिलना चयिये ।
पर कालं 7 स्कूल क सब' लड़के तौ बिलकुल अ न । ड़ । था । एक बार किसी लडकी को चोद लें तौ
क्तहूँखा इलंनों षय (ते कि पूरे प्तारुणा वने १८1८। ९ हो आशु । और' राजेश 7 वो तो मिनटों में झड़
जाना य । हाँ पर उसके डैडी की तो वात ही कुछ औरुं यी! पर उसे बाप का लन्ड नसीब कहाँ
हो सकता। कोई आर विकल्प ढूंढना पड़ेगा - कोई जो म्राहरुं भर ढिढोरा न पीटता फिरे ।

सोनिया की अपन 1 साल बडे भाई रवी का खयाल आया । दीवान पर लेटे टीवी देखतें
समय हरामी उसकी पैटी से तांक- झाक करना रहता था। बाथरुम से निकलती तो बदमाश
पीछे एक चमन मी जड़ देना । और जब कभी घर क प्राईवेट स्विम्मिग पूल में अपनी कासे रंग
की तंग बिकीनी पहनती तो टुकुचं-टुकुर' देखता। वेसे तो बडा बनता प, पर सोनिया की पता
था कि अभी साल का लन्ड किसी चुन क परवान नहीं चढा था । वैसे था बदन उसका हट्ट- कट्टा ।
व्रिकेट जो खेलता था । कितनी ही बर सोनिया उसे जिम की टाइट पसीने मरी टी- शर्ट या देख
कर उसके तगडे बदन को निहारती थीं । भीर जाँघों के बीच जो तना वषा हुआ बया था -
बिलकुल डैडी जेमा! ८' हरामी का डैडी जितना बड ही होगा ?" इम बेशरम खयाल ने खुद
उसे चौवन डालर था। भाई के तन हुए लन्ड की पादृश्रमृ।। से बेकाबू हाता ८३ । क्ष -1 । ने उक्त तन
को कंपकंपा दिया ।

याद आया उसे वो दिन जब वो बाथरूम में दाखिल हुई और वहां रवी को एकदम नंगा
पया! शायद उसने जगानचूझ कर' दरवाजा बन्द नारि किया था ताकि मम्मी या सोनिया घुम
आये । लन्ड तना तो नहीं था पर उसके आकार को देख सोनिया जान गयी थी की जो तन गया
तो भारी-मरकम हथोड़े से कम नारि होगा। सोनिया न तुरप्त ही माफी मंभी और बाथरुम से
बाहर निकली तो रबी के होंठों पर एक कुटिल मुरन्कान देरवीं ।

फिर उसकी यार में आया आशीष - उसकी स्नकेली का यार था। लंबा मुस्टडा जवान थे और सुनने में आया था के लड़कियों को छोड़ने में भी बड़ा माहिर था I 

पर सहेली के यार से चुदवाना सही नहीं.

Chapter 4