C0=5== Papi Parivaar - Chapter 5 - EroticPad.com
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Papi Parivaar Chapter 5

सपने की दुनिया

सोनिया को हल खुद - ब - खुद ही सूझ माया - अयूब अन्सकंरी , पडोस में एक लड़का था । उम
उत्रीप्त लम्बे फैज-ने-बल- बाल , नशीली अरेंखें । दो साल पहले ही तो अन्सकंरी परिवार पडोस
में आया था। माँ आयेशा अन्सगारी , जुडवाँ बहन शबनमा ज्ञाबनम का तो उसके घर अच्छनं
आना बजाना भी- था । ८८ अयूब ही ठीक रहेगा! पर साले को लाइन कैसे मारूं ? घर के प्राईवेट
स्तिम्मिग पूल की मरम्मत करने जब आयेगा तभी मौका मिल सकता है ।" सोनिया यूं योजना
बना चुकी- थी । अयूब को प-ताने- की- इस साजिम्ह उसके चे-हे पर वासन भारी- एक मृस्कग्न ले
आभी थीं ।

नींद के आगोश में अब उसके मन में बाप के बारे में पाप भरी तस्वीरें नाच रहीं थीं । सपने-
में उसने देखा- कि डैडी अपने भऱरि- भरकम लन्ड को- हाथ में लिये उसकी- फैली हुई बाँधों के
बिच झुके हुए थे । पास ही उसकी- मम्मी- उत्तर भाई बिलकुल नमें खडे थे । भाई रबी- क निर
बिलकुल बाप जैसे लम्बनं उत्तर कड़क तना हुअ । डैडी ने जैसे अपने लन्ड के- सिरे से उसकी चूत
के दरवाजे कों खटखटाया, सोनिया शरम से माँ से कहने लगी । ८' मम्मी मुझें माफ़ करना । मैं
खुद को रोक नहीं पायी !" पर मर्माफे के चेहरे पर वासना की लाली थीं और वो नजारा देख
कर रन्डीयोमृग जैसे बेशरम हों कर मुस्कुरा रही थी ।

"मुझे कोई ऐतराज नहीँ बेटी ! मेंरे वास्ते मस्ती की चीर तो मेरी मुडी में ही है !" माँ रीटा
जी की हथेली प्यार से बेते रबी के कड़क लन्ड पर लिपटी हुई थी । रबी- जवाब में एक हाथ से
अम्मी- के उभरे हुए पुख्तनं मुम्मेक्वें को दवा हां थ और दूसरे से मम्मी की रिसती हुई इमं-टे-दार
घृत को टोल रहता था ।

"पर मरिमें अपने ही वेतें से- ! !" माँ को भाई रबी- के तने लन्ड की अपनी चूर के झोलों में
डालते देख दो बोलीं ।

" तो क्या मेंरां बेता र्चादना नहीं जनता ? एक बार तु भी आजमा कर देख मादची९द की !"
सोनिया को यकीन नहीं- हुअनं जब अम्मी- ने एक अटके में भाई का लोहे सा तना लन्ड चूत में
हड़प लिया । ठीक उसी- समय उसने अपने- डैडी का बम्द अपनी- चूत को चीरता हुउग़ महसूस
किया । फिर उसके मुँह से जो चीख निकली उससे दर्द नहीं , केवल रो-ममच- था । अपने सपने
की झूमती कल्पना में उसने अपनी माँ को भी- उसी मिटे पाप के उम्मा-द में चीखते सुना ।

Chapter 5