C0=6== Papi Parivaar - Chapter 6 - EroticPad.com
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Papi Parivaar Chapter 6

��…केले नहाना मना है

भोर के सूरज की किरनों ने सोनिया की बंद पलकों पर पड कर उसे जगा दिया । अंगडाइया
लेते हुए उसने- रात की घटना और अपने सपने- की याद किया । बघा मा-जे-दार दिन गुजरा! इत्तना
मजा थ कि अब भी- उसकी पैंटी गीली थी ।

फिर उसे- अपनी साजिश की याद आयी जो उसने खुद के लिये लन्ड का जुगाड करने के
लिये रची- यी । मर्यादाक्श अपनी लेटिन की परदर्णी नाईटी , जिससे वर्लबिज पुर दिखता य,
पर तौलिया ओढे वो बाथरूम की- अंतर चल परी । दरवाज खुला था तो वों घुस जायी- । घुसते ही
एक मर्दाना अवाज ने उसे चौका दालां । " अपांऔ बहना !" उसका भाई रबी- फिर पुरानी करतूत
दोहरा रहा था । इस बार तो सोनिया उससे डरने वाली- नहीं यि ।

इत्मिनान से मुस्कुराई श्रेत्र- सीधे आँख से आँख मिला कर बोलीं " र-नान कर चुके मैया?"

हुई ह३ ३ 3 हाँ सोनिया बस 2 मिनट और दो । 3' अपना सर ती-लिये- से पोंछता हुरभा बडे मजे से
बहन के प्तामने नग्नता क प्रदर्शन कर रहा था । पलट के सोनिया- की अतर मुस्कुराने लगा …
सोचा था वो मरे शरम के नौ दो ग्यारह हो जायेगी । सोनिया ने ऐसा कुछ नहीं किया , बर्ल्सफे
कुल्लम- फुल्ल भाई के- बदन को घूर- धुर कर मुआयना करने- लगी । रवी की खिल्ली उडाने के
लिये चुटकी- लें कर बोली- ।

८८ ऊह ! मैं जानती हूँ ये बघा लटक रहा है इधर !" मैंया रबी- के झुलते लन्ड की अंतर इशारा
कर के बोली ।

"तो वोलौ कम है?" रबी- ने आशना-पूर्वक पूछनं ।

"लन्ड जैसी- ही- कोइ चीज है , पर उससे कहीं छोटी !" रबी- के अवाक चेहरे को देख कर
खिलखिला कर हँस पडी । रबी- ने चेहे से झेंप को- पोंछ कर खेल ने शमिल होना चाहा ।

८८ हाँम भगवान ने मुझ से बडी नेंसाफी की !" अपने लटकते लन्ड को देखते हुए र्बाला । झेंपते
हुए रबी- ने बहन से पुछ? कि अगर तुम कहो तो मैं बाथरुम छंगंड हं 3

"बाहर जाने- की ऐसी भी- क्या जलदी' है प्यारि- भे-या !" सोनिया की निर्मोंकता ने खुद उसे
वोंका दिया । रबी- को- यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी- प्यारी- बहना उसकी- आँखों के सामने-
कपडे उतरने रहीं धी- । जैसे ही सोनिया ने- नाईटी के दोनों- रड़ेप को- धीरे से कमरों- से सर्काय ॰
नाईटी देर हो कर उसके कदमों पर शिर गयी । सोनिया की अच्छुइं किशोर चूचियों"- जैसे ही
फुदक कर बन्धन से मुक्त हुई , रबी- उन दो पकते हुए आर्मर्क को देख कर देश रह गया ।

८' तेजी- बहिन की तों " ॰ " अकस्मात् उसके मुँह से निकला ।

"बहिन की वया ?' सोनिया मुस्कुरावी ।

"कुछ भी- तो नहीं !" रबी- ने सकपकाते हुए बहन के नंगे गोयल पर गिद्ध सी- नजरें- गाडी ।

मैया की वासना भारी- नजरों- के सामने- यों अंश मैं-. प्रदर्शन का सोनिया को अब अलग ही
मजा आ रहा था । रबी- ने अपने सूखे हंगंम्नठंच्चाग्नकं पर जीम फेरी और उसकी नजरें सोनिया की


उच्चागलियों के- साथ … साथ उसकी पैटी की इत्ना-स्लिक के अडर फिसलीं । अब सोनिया अपने भाई
को- उंगलियों के इशारे पर नचा रहीं थि । "सोचा न या कि इतनी आसानी से र्फप्त ज़ऱयेगनं ३'
सोचातें हुए सोनिया उस मखमली पैंटी को सो उसका आ-रिब-री- लनंज्जनं वस्त्र था , अपने नाजुक
छरहरे कूल्हो से स-रकाने लगी ।

जब सोनिया ने बडी नजाकत से एक के बाद एक अपनी दोनों चिकनी , सुडौल टाच्चगें उठा
कर पैटी के दोनों पायों को जिस्म से अलग किया तो बहन के नंगे यौवन को देख रची- की
हवेर्या९ ही उड़ गयीं । दो- बहन की गुलाबी टपकती चुत के झोलों को उसकी भूरी- भूरी महीन
आयतों- के बीच साफ़ खिलता देख पा रहा था। खुद - ब - खुद उसकी- जीम से पापी वासना की-
लार टपकने लगी ।

८८ कहीं वया बोलने- हो है" सोनिया खिल-रिव-लर पडी और रबी- को मौचदृएं छोड़ शॉवर के नीचे
खडी हो गैइ ।

सोनिया को एक कुटिल रोमांच का अनुभव हो रहा था। उसे लगने लगा था कि मर्दों के
सामने रिज्ञस्म की नुमाइश में वाकई अलग ही मजा आता है । शोंवर के गरम पानी ने उसके-
जबाँम बदन को तरोताब्बेज्ञनं कर दिया था ।

Chapter 6